भारत के पश्चिमी घाट की गोद में स्थित कदमपुड़ी गांव (Kadamapuzha या Kadampuzha नहीं, बल्कि Kadamapadi/कदमपुड़ी) एक अनोखी पहचान रखता है। यह गांव कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित है और इसे अक्सर “छोटा स्वर्ग” कहा जाता है क्योंकि यह साल के कई महीने पानी में डूबा रहता है, फिर भी यहां के लोग अद्भुत ढंग से जीवन जीते हैं।
प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर
कदमपुड़ी गांव पश्चिमी घाट की हरियाली और झीलों से घिरा हुआ है। जब मानसून आता है, तो यह गांव लगभग पूरी तरह पानी में डूब जाता है, सिर्फ घरों की छतें या ऊपरी मंज़िलें दिखाई देती हैं। गांव की सुंदरता तब और निखर जाती है, जब जलधाराएं, झरने और झीलें उसे घेरे रहती हैं। इसी कारण इसे “छोटा स्वर्ग” की उपमा दी जाती है।
पानी में जीवन
बारिश के मौसम में यह गांव लगभग 4-5 महीने पानी में डूबा रहता है। इसके बावजूद लोग यहां रहना नहीं छोड़ते। वे नावों का उपयोग करके एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे, किसान, दुकानदार-सभी नावों के जरिए अपना जीवन चलाते हैं। यह नजारा किसी जल नगर जैसा लगता है।
परंपरा और संस्कृति
यहां के लोग जलवायु की चुनौतियों के बावजूद अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। गांव में कई मंदिर और सांस्कृतिक स्थल हैं, जो हर साल स्थानीय मेले और त्योहारों का आयोजन करते हैं। ग्रामीणों की आपसी एकता और सहयोग ही इस जलमग्न जीवन को संभव बनाता है।
सरकार की ओर से प्रयास
हालांकि सरकार ने यहां जल निकासी की कुछ योजनाएं चलाई हैं, लेकिन गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वर्षा ऋतु में पानी भरना लगभग तय है। अब यह गांव पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनता जा रहा है, खासकर उनके लिए जो प्रकृति और अनोखे अनुभवों को पसंद करते हैं।
प्रकृति के साथ संतुलन
कदमपुड़ी गांव केवल एक स्थान नहीं, बल्कि इंसानी जिजीविषा और प्रकृति के साथ संतुलन का प्रतीक है। पानी में डूबा यह छोटा स्वर्ग हमें यह सिखाता है कि यदि इच्छाशक्ति और सामूहिकता हो, तो कठिन से कठिन हालात में भी जीवन को खूबसूरत बनाया जा सकता है। यदि आप कभी कर्नाटक जाएं, तो इस अनोखे गांव को जरूर देखने की कोशिश करें-यह एक बार की यात्रा नहीं, एक यादगार अनुभव होगा।



