मंडी : प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी मंडी में सात दिन तक चले अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव का समापन अत्यंत हर्षोल्लास और पारंपरिक भव्यता के साथ संपन्न हुआ, जिसमें बतौर मुख्यातिथि राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और विशेष अतिथि के रूप में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिरकत की। महोत्सव के अंतिम दिन का आगाज नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर द्वारा अत्यंत आध्यात्मिक वातावरण में किया गया, जहां उन्होंने सुबह सबसे पहले अधिष्ठात्री देवी माता टारना और बड़ा देव कमरूनाग के दरबार में शीश नवाया और विशेष पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके पश्चात, पारंपरिक ‘जलेब’ (शाही शोभायात्रा) के प्रस्थान से पूर्व जयराम ठाकुर ने मंडी के आराध्य देव राज माधव राय के मंदिर में पहुंचकर विधिवत पूजा में भाग लिया और देव परंपराओं का निर्वहन किया। दोपहर बाद जब अंतिम भव्य जलेब निकाली गई, तो राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और जयराम ठाकुर एक साथ इस रथ यात्रा के साक्षी बने। इस दौरान उन्होंने चौहट्टा बाजार स्थित ऐतिहासिक बाबा भूतनाथ के मंदिर में भी दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। यह विशाल शोभायात्रा ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों और करनाल की मधुर ध्वनियों के बीच पूरे शहर की परिक्रमा करते हुए वापस पड्डल मैदान पहुंची, जहां राज्यपाल ने विधिवत रूप से इस सात दिवसीय मेले के समापन की घोषणा की। इस अवसर पर मीडिया से भावुक संवाद करते हुए जयराम ठाकुर ने मंडी शिवरात्रि को ‘देवताओं का महाकुंभ’ बताते हुए कहा कि यह महोत्सव हमारी प्राचीन और समृद्ध देव संस्कृति का जीवंत संवाहक है, जहां साल भर के लंबे इंतजार के बाद 200 से अधिक देवी-देवता अपने देवालयों से निकलकर भक्तों को दर्शन देने मंडी जनपद पधारते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि राज्यपाल महोदय की गरिमामयी उपस्थिति ने इस वर्ष के उत्सव की चमक को और अधिक बढ़ा दिया है। ठाकुर ने जोर देकर कहा कि पारंपरिक जलेब केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि देव और मानस के अटूट मिलन की एक अनुपम झलक है, जहां एक ओर देवता अपने आशीर्वाद से जनमानस को धन्य करते हैं, तो दूसरी ओर देवलुओं और श्रद्धालुओं का असीम उत्साह देखते ही बनता है। उन्होंने आह्वान किया कि पहाड़ी जीवन के अभिन्न अंग रहे इन पारंपरिक मेलों के संरक्षण और देव संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए समाज और सरकार को और अधिक गंभीर एवं सामूहिक प्रयास करने होंगे ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें। उन्होंने मंडी नगर स्थापना के 500वें वर्ष में प्रवेश की बधाई देते हुए कहा कि ये बहुत हर्ष का विषय है कि 2027 में मंडी अपनी स्थापना के पांच सौ वर्ष पूरे करेगा। समापन समारोह के इस ऐतिहासिक अवसर पर जयराम ठाकुर के साथ उनकी धर्मपत्नी डॉ साधना ठाकुर, सदर विधायक अनिल शर्मा, विधायक विनोद कुमार, इंद्र सिंह गांधी, चंद्रशेखर, पूर्ण चंद, दलीप ठाकुर, दीपराज, और नगर निगम मंडी के मेयर वीरेंद्र भट्ट सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिन्होंने इस देव मिलन के साक्षी बनकर अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान प्रकट किया।
एआई इम्पैक्ट समिट भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगी : जयराम ठाकुर
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मण्डी जिला के बल्ह विधानसभा क्षेत्र के चक्कर में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” को सुना और इसके पश्चात प्रदेश चिकित्सा प्रकोष्ठ (एलोपैथी) की परिचय बैठक व कार्यशाला को संबोधित किया। इस अवसर पर जयराम ठाकुर ने भारत मंडपम में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ की सफलता के लिए प्रधानमंत्री और देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन पीएम मोदी के दूरदर्शी विजन का परिणाम है, जिसने विश्व पटल पर भारत के तकनीकी कौशल, उन्नत एआई मॉडल्स और नवाचार की क्षमता का लोहा मनवाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समिट भारतीय प्रतिभा और तकनीकी आत्मनिर्भरता को सशक्त कर देश के युवाओं के लिए प्रगति के नए मार्ग प्रशस्त करेगी। “मन की बात” के माध्यम से डिजिटल सुरक्षा पर चर्चा करते हुए उन्होंने नागरिकों से ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया और कहा कि प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन एक सुरक्षित और विकसित भारत के निर्माण में जनभागीदारी को सुदृढ़ कर रहा है। इसके उपरांत, चिकित्सा प्रकोष्ठ की बैठक को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने चिकित्सकों को समाज में सेवा, समर्पण और संवेदना का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की जिम्मेदारी केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और समाज के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर चिकित्सा सुविधा पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश चिकित्सा प्रकोष्ठ भविष्य में जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में और अधिक सक्रिय एवं सशक्त भूमिका निभाते हुए सेवा के मूल मंत्र को मजबूत करेगा। इस दौरान उन्होंने संगठनात्मक ढांचे और जनसेवा के प्रति चिकित्सकों के सामाजिक दायित्वों पर भी विस्तृत चर्चा की।

