उत्तरी ध्रुव (North Pole) पृथ्वी का वह बिंदु है जहां पृथ्वी की घूर्णन धुरी उत्तरी छोर पर समाप्त होती है। इसे अक्सर “दुनिया का आखिरी किनारा” भी कहा जाता है, क्योंकि इसके आगे कोई भूमि या महाद्वीप नहीं है, सिर्फ बर्फ और महासागर है। यहाँ पर जो कुछ है, वह वैज्ञानिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत रोचक है।
उत्तरी ध्रुव में क्या है –
1. बर्फ और महासागर –
उत्तरी ध्रुव के नीचे स्थायी भूमि नहीं है। यह पूरा क्षेत्र आर्कटिक महासागर का हिस्सा है, जिसके ऊपर मोटी समुद्री बर्फ जमी रहती है। सर्दियों में यह बर्फ 2–3 मीटर मोटी हो जाती है।
2. छह महीने दिन, छह महीने रात –
उत्तरी ध्रुव पर साल में केवल दो बार सूर्योदय और सूर्यास्त होता है। लगभग 6 महीने लगातार दिन और 6 महीने लगातार रात रहती है। गर्मियों में सूर्य कभी डूबता नहीं और सर्दियों में कभी निकलता नहीं।
3. अत्यधिक ठंड –
यहाँ का औसत तापमान सर्दियों में –40°C तक और गर्मियों में भी 0°C से ऊपर शायद ही जाता है। तेज हवाएँ और बर्फीले तूफ़ान इसे और खतरनाक बनाते हैं।
4. कोई स्थायी बस्ती नहीं –
उत्तरी ध्रुव पर कोई शहर, गांव या स्थायी इंसानी आबादी नहीं है। यहाँ केवल अस्थायी वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र या बर्फ पर बनाए गए कैंप मिलते हैं।
5. वन्य जीवन –
ध्रुवीय भालू, सील, वालरस और आर्कटिक लोमड़ी जैसे जीव आसपास के क्षेत्रों में मिलते हैं। पानी के नीचे व्हेल और मछलियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
6. प्राकृतिक घटनाएँ –
गर्मियों में मिडनाइट सन (आधी रात का सूरज)।
सर्दियों में नॉर्दर्न लाइट्स (ऑरोरा बोरेलिस) की अद्भुत चमक।
बर्फीले तूफान और ग्लेशियरों का टूटना।
7. भू-राजनीतिक महत्व –
उत्तरी ध्रुव कई देशों (रूस, कनाडा, अमेरिका, डेनमार्क, नॉर्वे) के बीच संसाधनों और समुद्री मार्गों को लेकर रणनीतिक महत्व रखता है। बर्फ पिघलने से नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं और तेल-गैस जैसे संसाधनों तक पहुँच आसान हो रही है।
केवल बर्फ से ढका महासागर
दुनिया के इस आखिरी किनारे पर न तो खेत हैं, न शहर, न इंसानों की स्थायी दुनिया। यहाँ केवल बर्फ से ढका महासागर, अत्यधिक ठंड, अद्भुत प्राकृतिक घटनाएँ और कठोर परिस्थितियों में जीवित रहने वाले जीव हैं। यह पृथ्वी का वह कोना है, जो हमें प्रकृति की चरम सीमाओं और जीवन की सहनशक्ति का अनुभव कराता है।



