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चलती हुई ज़िंदगी

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साहिल शर्मा
ये ज़माना अपनी राहें खुद बनाता जाएगा,
हम न रहेंगे—पर कोई हमारी तरह निभाता जाएगा।

हम जो थे, एक सादा-सा निशान वक़्त की धूल में,
कल कोई और उसी धूल से अपना चेहरा उकेरता जाएगा।

हमारी ख़ामोशी में जो सच धड़कता रहा,
किसी और की आवाज़ में वही सच गूँजता जाएगा।

हम थक भी गए तो क़िस्सा यहीं ख़त्म न होगा,
कोई और उसी मोड़ से फिर से आगे बढ़ता जाएगा।

न हमने ही दुनिया को अर्थ दिया था कभी,
न हमारे बिना इसका मतलब बदलता जाएगा।

बस इतना ही नियम है इस चलती हुई ज़िंदगी का—
हम न रहेंगे… पर कोई हम-सा मिलता जाएगा।

(कवि/शायर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के बाहल अर्जुन गांव के रहने वाले हैं)

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Author: speedpostnews

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