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कांगड़ा जिला के रैत में जागोरी का युवा रंगमंच महोत्सव 13 को, कालेज विद्यार्थी लैंगिक न्याय और पर्यावरणीय न्याय जैसे मुद्दों पर प्रस्तुति देंगे 

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धर्मशाला : कांगड़ा जिला में रैत के पास चंबी मैदान में 13 फरवरी को युवा रंगमंच महोत्सव का आयोजन होगा। इसमें कांगड़ा जिले के अलग-अलग कालेजों के विद्यार्थी भाग लेंगे। महोत्सव जागोरी रूरल चैरिटेबल ट्रस्ट के वैश्विक अभियान उमड़ते सौ करोड़ (वन बिलियन राइजिंग) के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव युवाओं को कविता, नृत्य और रंगमंच के माध्यम से लैंगिक न्याय और पर्यावरणीय न्याय जैसे मुद्दों पर अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने का मंच प्रदान करेगा।
भारत में इस अभियान की सह समन्वयक मनीषा झालान ने बताया कि ये महोत्सव एक उम्मीद की किरण भी है, जहां युवा कलात्मक तरीकों से अपनी बात सबके सामने रखेंगे कि वे कैसे भविष्य की कल्पना करते हैं। युवा रंगमंच महोत्सव के अंतर्गत युवा प्रतिभागी ‘देह से धरती तक’ विषय पर नाटक, नृत्य या कविता के माध्यम से प्रस्तुति देंगे, जो शरीर के अधिकार, सहमति, मानवीय गरिमा, प्रकृति और सह-अस्तित्व जैसे मुद्दों को रचनात्मक रूप से सामने लाएंगे। यह महोत्सव युवाओं को लड़कियों, महिलाओं, जेंडर-विविध लोगों और धरती की आवाज को मंच पर लाने का अवसर देगा। एक न्यायपूर्ण, संवेदनशील और हिंसा-मुक्त भविष्य की कल्पना को सशक्त रूप में प्रस्तुत करेगा।
मनीषा झालान ने बताया कि वर्ष 2002 से कांगड़ा में सक्रिय जागोरी रूरल चैरिटेबल ट्रस्ट एक नारीवादी संगठन है, जो जमीनी स्तर पर लैंगिक न्याय, समावेशी सतत विकास, महिला हिंसा की रोकथाम, युवाओं के नेतृत्व निर्माण और हाशिये पर रहने वाले समुदायों के अधिकारों के लिए कार्य करता है। संस्था ने 2003 में 12 लड़कियों के साथ काम की शुरुआत की थी। अब कांगड़ा व चंबा जिंलों के 250 से अधिक गांवों में पहुंच बनाते हुए लगभग एक लाख लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। उमड़ते सौ करोड़ अभियान 2026 की थीम है -‘हमारा शरीर-हमारी धरती-हमारा भविष्य’। इस साल की थीम इस बात पर जोर डालती है कि हमारे शरीर, हमारी धरती और हमारा भविष्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। साथ ही इस बारे में बात होना बेहद जरूरी है कि हमारे शरीर और हमारी धरती पर हो रही हिंसा हमारे कल यानी युवाओं पर क्या प्रभाव डाल रही है।
भारत में वर्ष 2013 से जागोरी रूरल चैरिटेबल ट्रस्ट उमड़ते सौ करोड़ अभियान का नेतृत्व कर रहा है, जिसमें आभा भैया राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं। जागोरी संस्था इस अभियान के लिए राष्ट्रीय सचिवालय के रूप में भी कार्य करती है। उमड़ते सौ करोड़ महिलाओं, लड़कियों और जेंडर-विविध लोगों के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने का एक वैश्विक अभियान है, जिसकी शुरुआत 14 फरवरी, 2012 को प्रसिद्ध नाटककार, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता वी (पूर्व में ईव एन्सलर) द्वारा की गई थी। यह आंदोलन संयुक्त राष्ट्र के उस तथ्य पर आधारित है कि दुनिया भर में हर तीन में से एक महिला अपने जीवन में किसी न किसी रूप में हिंसा का सामना करती है।

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Author: speedpostnews

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