Home » साहित्य जगत/ब्लाग » उत्तराखण्ड और हिमाचल में सड़क जैसी जरूरी सुविधा के अभाव में पलायन की मजबूरी, खाली हो गए कई गांव

उत्तराखण्ड और हिमाचल में सड़क जैसी जरूरी सुविधा के अभाव में पलायन की मजबूरी, खाली हो गए कई गांव

Facebook
Twitter
WhatsApp

उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता के बावजूद एक गंभीर समस्या सामने आ रही है—सड़क सुविधा के अभाव के कारण सैकड़ों गांव खाली हो रहे हैं। यह समस्या न केवल स्थानीय निवासियों के जीवन पर असर डाल रही है, बल्कि इन राज्यों की सामाजिक और आर्थिक संरचना को भी प्रभावित कर रही है।

सड़क सुविधा का महत्व
पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें जीवन रेखा के समान होती हैं। स्कूल, अस्पताल, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाएं इन्हीं सड़कों के माध्यम से ही सुलभ होती हैं। लेकिन कई गांवों तक आज भी पक्की सड़कें नहीं पहुंच पाई हैं। खराब या पूरी तरह से अनुपलब्ध सड़क संपर्क के कारण गांवों में रहना कठिन होता जा रहा है।

पलायन की विवशता
उत्तराखण्ड के पहाड़ी जिलों जैसे पौड़ी, चमोली, पिथौरागढ़, और हिमाचल के शिमला, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्रों में हजारों लोग अपने पुश्तैनी गांवों को छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। इनमें से अधिकतर युवा रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की तलाश में शहरों का रुख करते हैं, लेकिन जब गांवों में संपर्क साधन ही न हों, तो वृद्ध और महिलाएं भी मजबूरी में पलायन को विवश हो जाते हैं।

खाली होते गांव : सामाजिक असर
इन गांवों के खाली होने से वहां की परंपराएं, स्थानीय बोली, हस्तशिल्प और कृषि परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं। खेती-बाड़ी के काम रुक गए हैं, फलदार पेड़ सूख रहे हैं और कई घर खंडहर बनते जा रहे हैं। गांवों का सामाजिक ताना-बाना टूट रहा है और लोग अपनी जड़ों से कटते जा रहे हैं।

सरकार की भूमिका और चुनौतियां
हालांकि सरकार ने “प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना” जैसी योजनाएं चलाई हैं, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में भौगोलिक कठिनाइयों, भूस्खलन, पर्यावरणीय बाधाओं और बजट की कमी के कारण कार्य बहुत धीमा चल रहा है। कई बार सड़कों का निर्माण शुरू होता है, लेकिन अधूरा छोड़ दिया जाता है।

समाधान की ओर कदम
सरकार को चाहिए कि वह इन क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति बनाए। छोटे और सोलर-चलित वाहन मार्ग, केबल कार, और रोपवे जैसी वैकल्पिक परिवहन सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। स्थानीय लोगों को भी विकास कार्यों में भागीदार बनाया जाए ताकि वे अपने गांवों से जुड़ाव महसूस कर सकें।

ऐसे में खो देंगे विरासत
उत्तराखण्ड और हिमाचल के गांव केवल भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। यदि समय रहते सड़क सुविधाओं को बेहतर नहीं बनाया गया, तो न केवल ये गांव पूरी तरह से वीरान हो जाएंगे, बल्कि हम अपनी विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी खो देंगे। विकास की असली पहचान तभी होगी जब गांवों में भी जीने लायक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।

speedpostnews
Author: speedpostnews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *