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अस्तित्व विहीन

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डॉ. राजीव डोगरा
बड़े-बड़े सिकंदर
यहाँ आये
मानते थे खुद को
बड़े बलशाली धुरंधर।

फिर भी बचा न सके
अपने अस्तित्व को
समेट लिया
मिट्टी ने अपने अंदर।

खुद को खुदा जाना थे
मगर औरों को
सदा गधा पहचानते थे।

खुदा ने उनको भी
अपना अस्तित्व दिखा दिया
मिट्टी में मिलकर
मिट्टी ही कर दिया।

(युवा कवि एवं लेखक, हिंदी अध्यापक। गांव जनयानकड़, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
पिन कोड -176038
rajivdogra1@gmail.com)

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Author: speedpostnews

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