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अलवर के महाराजा जय सिंह का कुत्ता चलाता था तोप; तोप फटने से हुई थी कुत्ते की मौत, राजा ने कुत्ते की याद में कब्र बनाई, जो आज भी मौजूद

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इतिहास की अनगिनत घटनाओं में कुछ ऐसी कहानियां होती हैं, जो अपनी विचित्रता और अनूठेपन के कारण लोगों के दिलों में बस जाती हैं। ऐसी ही एक रोचक कहानी राजस्थान के महाराजा जय सिंह और उनके प्रिय कुत्ते की है। यह घटना 1885 की है। महाराजा का कुत्ता तोप चलाता था। इस कुत्ते की स्मृति में कब्र भी बनाई गई, जो आज भी मौजूद है।

तोप के परीक्षण के दौरान जान बचाने को पानी में कूदता था कुत्ता विक्टर
अलवर में किले से जुड़े दस्तावेजों में विक्टर नाम के कुत्ते का जिक्र आता है। किले के पास इमारत है। इसे तोप का कारखाना बताया जाता है। इसी कारखाने में तोपें बनाई जाती थीं, जिनका परीक्षण होता था। इन परीक्षणों के दौरान तोपें फटने से कई बार मौत भी हो जाती थी। इसके लिए विक्टर नामक कुत्ते को प्रशिक्षित किया था। वह कुत्ता तोप चलाने के बाद पानी के कुंड में छलांग लगा देता था। रिकार्ड के अनुसार एक बार बड़ी तोप बनाई गई। इसका परीक्षण विक्टर कुत्ते को करना था। इस दौरान तोप फट गई। भयंकर विस्फोट से कुत्ते की मौत हो गई। कुत्ते की याद में राजा ने तोपखाना परिसर में उसकी समाधि बनाई।

महाराजा का विशेष लगाव
इस घटना के बाद महाराजा जय सिंह ने इस कुत्ते को शाही सम्मान दिया। उस दौर में जानवरों, खासकर घोड़ों और हाथियों को तो विशेष दर्जा दिया जाता था, लेकिन एक कुत्ते को इतना महत्व मिलना असामान्य था। महाराजा ने इसे अपनी सेना का एक महत्वपूर्ण सदस्य मान लिया और उसके नाम से एक स्मारक भी बनवाया।

कुत्ते की कब्र
कुत्ते की याद में कब्र बनवाई। आमतौर पर उस समय केवल राजपरिवार या उच्च पदस्थ व्यक्तियों की ही कब्रें बनाई जाती थीं, लेकिन इस वफादार कुत्ते के लिए एक अलग स्थान निर्धारित किया गया। राजस्थान में यह दुर्लभ उदाहरण है, जहां एक जानवर के लिए इतने सम्मान के साथ समाधि बनाई गई।

ऐतिहासिक महत्व
आज भी इस कहानी को लोग रोचकता से सुनाते हैं। यह घटना महाराजा के अपने पालतू जानवरों के प्रति प्रेम, उनके न्यायप्रिय स्वभाव और इतिहास में दर्ज अजीबोगरीब घटनाओं में से एक का उदाहरण देती है। यह दर्शाती है कि किस तरह एक कुत्ता भी इतिहास का हिस्सा बन सकता है और उसकी स्मृति को सहेजने के लिए एक कब्र बनाई जा सकती है। यह किस्सा राजस्थान के समृद्ध ऐतिहासिक धरोहरों और अनोखी परंपराओं का प्रतीक है। महाराजा जय सिंह का यह कदम दर्शाता है कि शाही जीवन में भी भावनाओं और रिश्तों का महत्वपूर्ण स्थान था, चाहे वह इंसान से हो या किसी जानवर से।

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Author: speedpostnews

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