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अंतरिक्ष में जाने वाले यात्री इस तरह नियंत्रित रखते हैं अपनी डायबिटीज

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अंतरिक्ष यात्रियों के लिए डायबिटीज (मधुमेह) को नियंत्रित रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि अंतरिक्ष में शरीर की कार्यप्रणाली (metabolism) पृथ्वी से अलग तरह से काम करती है। आइए विस्तार से समझते हैं कि वे इसे कैसे संभालते हैं

1. डायबिटिक अंतरिक्ष यात्री का चयन बहुत सोच-समझकर होता है

नासा, ईएसए (ESA) और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां केवल उन्हीं डायबिटिक व्यक्तियों को अनुमति देती हैं, जिनकी बीमारी पूर्ण रूप से नियंत्रित हो।

उन्हें उड़ान से पहले महीनों तक जांचा जाता है कि उनका ब्लड शुगर स्तर स्थिर रहता है या नहीं।

अगर उन्हें टाइप 1 डायबिटीज है, तो यह सुनिश्चित किया जाता है कि वे इंसुलिन या ग्लूकोज के स्तर को खुद कुशलता से मॉनिटर और प्रबंधित कर सकते हैं।

2. आहार (Diet) पूरी तरह नियंत्रित होता है

अंतरिक्ष यात्री का भोजन पहले से कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के अनुसार तय किया जाता है।

डायबिटिक यात्री को कम शुगर और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला भोजन दिया जाता है।

वे निर्धारित समय पर ही भोजन करते हैं ताकि शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव न हो।

3. ब्लड शुगर की निरंतर निगरानी (Continuous Glucose Monitoring)

वे छोटे, वायरलेस Continuous Glucose Monitoring (CGM) डिवाइस पहनते हैं जो हर कुछ मिनट में ब्लड शुगर का स्तर मापता है।

ये डेटा रीयल टाइम में अंतरिक्ष यान के मेडिकल सिस्टम और पृथ्वी पर डॉक्टरों तक पहुंचता है।

4. नियमित व्यायाम (Exercise Routine)

माइक्रोग्रैविटी में शरीर की मांसपेशियां और इंसुलिन संवेदनशीलता प्रभावित होती है, इसलिए
ट्रेडमिल, साइकिल या रेसिस्टेंस मशीनों पर प्रतिदिन लगभग 2 घंटे व्यायाम अनिवार्य है।

इससे ब्लड शुगर नियंत्रण और मेटाबोलिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

5. दवाइयों और इंसुलिन का सुरक्षित भंडारण

इंसुलिन को उचित तापमान पर रखने के लिए विशेष मेडिकल कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स होती हैं।

ज़रूरत पड़ने पर इंसुलिन पेन या इंजेक्शन का उपयोग किया जाता है।

दवाओं को कंपन और रेडिएशन से बचाने के लिए पैकिंग विशेष होती है।

6. नियमित जांच और पृथ्वी से संपर्क

मिशन कंट्रोल सेंटर के डॉक्टर रोजाना उनका स्वास्थ्य डेटा मॉनिटर करते हैं।

अगर किसी अंतरिक्ष यात्री का ब्लड शुगर असामान्य हो जाए तो आपातकालीन प्रोटोकॉल सक्रिय किया जाता है।

7. मिशन से पहले सख्त ट्रेनिंग

उड़ान से पहले डायबिटिक अंतरिक्ष यात्री कई महीनों तक सिम्युलेशन ट्रेनिंग लेते हैं—
जिसमें यह सिखाया जाता है कि

कैसे इंसुलिन डोज एडजस्ट करनी है,

शुगर गिरने या बढ़ने पर क्या करना है,

और अंतरिक्ष स्थितियों में शरीर कैसे प्रतिक्रिया देता है।
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Author: speedpostnews

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